पहली बारिश का पहला आँसू पहले-पहले प्यार का
गिर जाने दो आज, कोई मुझे रोको मत
एक ख्वाइश थी जी भर रो लेने की
पूरा होने से इसे टोको मत...
यूँही ये बारिश धरती पर बेमौसम उतरी न होती
पहुची होगी बादल तक आह वरना बूँदें रोयी न होती
घुल जाने दो सारी कराहें, यूँ जीने से फिर रोको मत
फिर सूख जाएँगे बारिश के साथ, गिरने से आंसू रोको मत...
पहले प्यार का पहला दर्द है,जश्न से कोई रोको मत
बहुत दर्द है बहाने को अभी,लिखने से मुझे कोई रोको मत...
मशहूर हुए कुछ ऐसे अपनी चाहत के काबिल न रहे
डूबे यूँ तेरी चाहत मेंसाहिल के काबिल ना रहे
किसी से क्या करें शिकायत अपनी बर्बादी की?
किसी से क्या करें हम शिकायत अपनी बर्बादी की
यूँ मशगूल हुए हम तुझमे साँसों के काबिल न रहे...
भीगकर बैठी नमी फिर तैरने को उठ आई है
खुरेद लेने दो ज़ख्मों को, इन्हें मनमानी से रोको मत
उतर रहीं लकीरें भी हाथों से , बह जाने से इन्हें टोको मत...
पहले प्यार का पहला आंसू है...रो लेने से मुझे रोको मत
पहले दर्द की पहली बारिश...भीग जाने से मुझे टोको मत
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#Poem
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