Thursday, 31 July 2014

कोई मुस्कुरा देता है तो...

कोई मुस्कुरा देता है तो मैं हाथ बढ़ा देता हूँ
कोई हाथ बढ़ा देता है तो सीने से लगा लेता हूँ
कुसूर बस इतना है मेरे पागल दिल का
कोई धड़कन मिल जाती है तो सीने से लगा लेता हूँ...

हर चेहरे को देखकर अपने दिल को कुछ समझाता हूँ
उड़ती ज़ुल्फ़ो के पीछे आहों-आहों में रह जाता हूँ
एक इशारा-भर मिल जाए तो क्या बात है
सुध-बुध सारी गँवाकर ख्वाबों-ख्वाबों मे रह जाता हूँ...


हम तो दुनिया की खूबसूरती के कायल हैं
खुदा की बनाई सूरतों की अदायगी के घायल हैं
हम तो बस अपना दिल खोलकर रख देते हैं
दुनिया समझा करती है हम नये दौर के शायर हैं...

कोई नज़र मिला लेता है तो निगाहों में बसा लेता हूँ
कोई ख्वाब सजा देता है ज़िंदगी बना लेता हूँ
कुछ ऐसे ही चल रहा ज़िंदगी का सफ़र
राह मे कोई दिख जाए तो साथ बिठा लेता हूँ...

कोई मुस्कुरा देता है तो मैं हाथ बढ़ा देता हूँ
कोई हाथ बढ़ा देता है तो सीने से लगा लेता हूँ...
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#Poem
#apourv_pandey

Monday, 14 July 2014

पहले प्यार का पहला आंसू...

पहली बारिश का पहला आँसू पहले-पहले प्यार का
गिर जाने दो आज, कोई मुझे रोको मत
एक ख्वाइश थी जी भर रो लेने की
पूरा होने से इसे टोको मत...



यूँही ये बारिश धरती पर बेमौसम उतरी न होती
पहुची होगी बादल तक आह वरना बूँदें रोयी न होती
घुल जाने दो सारी कराहें, यूँ जीने से फिर रोको मत
फिर सूख जाएँगे बारिश के साथ, गिरने से आंसू रोको मत...
पहले प्यार का पहला दर्द है,जश्न से कोई रोको मत
बहुत दर्द है बहाने को अभी,लिखने से मुझे कोई रोको मत...

मशहूर हुए कुछ ऐसे अपनी चाहत के काबिल न रहे
डूबे यूँ तेरी चाहत मेंसाहिल के काबिल ना  रहे
किसी से क्या करें शिकायत अपनी बर्बादी की?
किसी से क्या करें हम शिकायत अपनी बर्बादी की
यूँ मशगूल हुए हम तुझमे साँसों के काबिल न रहे...

भीगकर बैठी नमी फिर तैरने को उठ आई है
खुरेद लेने दो ज़ख्मों को, इन्हें मनमानी से रोको मत
उतर रहीं लकीरें भी हाथों से , बह जाने से इन्हें टोको मत...

पहले प्यार का पहला आंसू है...रो लेने से मुझे रोको मत
                                        पहले दर्द की पहली बारिश...भीग जाने से मुझे टोको मत

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#Poem
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Wednesday, 9 July 2014

याद है...



रेत पर नंगे पैर चलते हाथों का छू जाना याद है
चाय की चुस्की लेते वक़्त नज़रों का मिल जाना याद है
याद है वो भीड़ में छिपकर एक-दूसरे को देखना
जानकार वो अनजाने में अपना करीब आना याद है...

दबे-दबे होठों पर तब कुछ लफ्ज़ हुआ करते थे
सोयी हुई नींदों में कुछ ख्वाब जगा करते थे
क्या दौर था वो जब आँखें बोला करती थीं
हम भी मुस्कुराकर दिल का हाल बयां करते थे...

वो तेरा तीखा काजल आँखों के कोनों में सजना याद है
तेरी पसंद का वो कंगन कलाई में घुमाना याद है
वो लटें तेरी जो रह-रहकर तुझे छेड़ा करती थीं
और उन्हें संवारते वक़्त वो तेरा इतराना याद है...



उफान पर थी धडकनें,करवटों की मनमानी थी
सिराहने सोये थे गम सभी,सिलवटों की शैतानी थी
कितने ही ख्वाब पल-पल बेचैन किया करते थे
प्यार की सीढ़ी चढ़ते वक़्त वो साँसें भी तूफानी थीं...

तेरा उड़ता दुपट्टा थामकर वो तुझे लौटना याद है
भीगी जुल्फें लहराकर वो तेरा शर्माना याद है
याद है वो चौराहा जहाँ इज़हार तुझसे किया था
और इशारों में तेरा वो हामी भरना याद है...

                                               रेत पर नंगे पैर चलते हाथों का छू जाना याद है...
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Friday, 4 July 2014

मुझसे बेहतर ही होगा...


  मैने तुम्हे चुना और तुमने किसी और को,जायज़ है वो...मुझसे बेहतर ही होगा...





बदल दिया खुद को तेरे खातिर
जिसकी चाहत तुझे भायी 
मुझसे बेहतर ही होगा
हम आईने से नफ़रत करते हैं
जो तुम्हे झुमका पहनाए 
मुझसे बेहतर ही होगा
गिरे आँसू मेरी आँखों से ये बात कुछ और है
जो तुझे पल-पल हंसाए 
मुझसे बेहतर ही होगा
मर भी गये तो क्या गम किसे?
मर भी गये तो क्या गम किसे
जो तेरी ज़िंदगी बन जाए
मुझसे बेहतर ही होगा...

बर्बादी का मंज़र चुना है मैने
जिसे तूने चुना
मुझसे बेहतर ही होगा
मैने तो खंजर पाया है
जो तेरा गजरा बने
मुझसे बेहतर ही होगा
हमें इशारों का रहा उम्रभर इंतेज़ार
जो तेरी आँखें चूम ले
मुझसे बेहतर ही होगा
मेरी फ़िक्र की बात छोड़ो जिसका रखे तू ख़याल
खुदा का वो दुलारा
मुझसे बेहतर ही होगा...
मुझसे बेहतर ही होगा...