मैने तुम्हे चुना और तुमने किसी और को,जायज़ है वो...मुझसे बेहतर ही होगा...
बदल दिया खुद को तेरे खातिर
जिसकी चाहत तुझे भायी
मुझसे बेहतर ही होगा
हम आईने से नफ़रत करते हैं
जो तुम्हे झुमका पहनाए
मुझसे बेहतर ही होगा
गिरे आँसू मेरी आँखों से ये बात कुछ और है
जो तुझे पल-पल हंसाए
मुझसे बेहतर ही होगा
मर भी गये तो क्या गम किसे?
मर भी गये तो क्या गम किसे
जो तेरी ज़िंदगी बन जाए
मुझसे बेहतर ही होगा...
बर्बादी का मंज़र चुना है मैने
जिसे तूने चुना
मुझसे बेहतर ही होगा
मैने तो खंजर पाया है
जो तेरा गजरा बने
मुझसे बेहतर ही होगा
हमें इशारों का रहा उम्रभर इंतेज़ार
जो तेरी आँखें चूम ले
मुझसे बेहतर ही होगा
मेरी फ़िक्र की बात छोड़ो जिसका रखे तू ख़याल
खुदा का वो दुलारा
मुझसे बेहतर ही होगा...
मुझसे बेहतर ही होगा...

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