Wednesday, 11 June 2014

आवाज़ नही मिलती...

Sep. 26, 2011. My first poem ever.



अपने साए से चौक जातें हैं,उनके साए की तस्वीर भी नही मिलती
रातभर गूंजते हैं सन्नाटे,मेरे नाम को कभी उनकी आवाज़ नही मिलती...



शायद कभी चाहा होगा उन्होने भी हमे,अब तो कभी नज़रें भी नही मिलती
सूख जाती हैं भीगी आँखें एक झलक को,आँखो को दो पल उनकी सूरत नही मिलती...

दिल की गहराई मे कहीं दफ़नाना भी चाहें अगर,उनकी याद ना आए ऐसी गहराइयाँ नही मिलती
उनकी तस्वीर से ही काट लेते ज़िंदगी अपनी,लेकिन मुकम्मल एक तस्वीर भी नही मिलती...

अरसा गुज़र जाता है ज़ुबान से होठों तक आने मे,काग़ज़ पर उतार दे ये एहसास ऐसी स्याही नही मिलती
दर्द का आलम ऐसा है की यही समझ लीजिए की दिल की चोटों को अब हमसे आह भी नही मिलती...

वो पहले थे जिन्होने दी थी दिल पर मेरे दस्तक, अब तो किवाड़ पर गिरी - पड़ी कोई आहट भी नही मिलती
आँखो के झरने को रोकना भी चाहें अगर, इस दरिया का रुख़ मोड़ सके जो ऐसी कोई तरकीब नही मिलती...

रातभर गूंजते हैं सन्नाटे,मेरे नाम को उनकी आवाज़ नही मिलती...
मेरे नाम को उनकी आवाज़ नही मिलती...
#MyInkMyPrints
www.apourvpandey.blogspotcom

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