आज हुई है बारिश,वैसी ही जैसे तब हुआ करती थी...
बारिश क्या हुई आज वो सावन में भीगना याद आ गया
गलियों से तेरी रह-रहकर मेरा वो गुज़रना याद आ गया
भीगी तेरी ज़ुल्फो पर जब अपनी उंगलियाँ फिराया करता था
उन दिनों वो तेरा हाथ थामे तन्हा चलना याद आ गया...
दीवारों पर लिखा करते थे साथ में अपना नाम
शाम की ठंड में तेरे हाथ की चाय पीना याद आ गया
वो तेरा मज़े लेते हुए चाय मे नमक डाल देना
और मेरा खुशी-खुशी वो जाम पीना याद आ गया...
कभी सोचा कहाँ था ज़िंदगी ये भी दिन दिखलाएगी
खुशियों पर नज़र लगाकर तुझको दूर कहीं ले जाएगी
देखते हुए जो सूरत मुझे घंटों कम पड़ जाते थे
उसकी एक झलक को आज ख्वाबों में भी तरसाएगी...
वो सुबहें जब तुझे देखने को झट से उठ जाया करते थे
तुम भी मुस्कुरकर मेरा प्यार बढ़ाया करते थे
तेरे खत पढ़ते हुए फिर ये एहसास हुआ मुझको
खुद से भी ज़्यादा तुम मुझसे प्यार किया करते थे...
भीग जो आईं पलकें मेरी तेरा दुपट्टा याद आ गया
हँसाने को फिर मुझको तेरा चेहरे बनाना याद आ गया
जब ज़िंदगी तेरे नाम थी मेरे नाम थी तेरी साँसें
तेरे खातिर मेरा जीना,मेरे नाम पे तेरा गुज़रना याद आ गया...
बारिश क्या हुई आज वो सावन में भीगना याद आ गया...
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#Poem
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