Thursday, 6 July 2017

मशहूर


जाम शराब का होठों पर लगा नही अभी
कमबख्त बेवजह ही ज़हर का शहूर मानते हैं...
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मख़मली लिबास, वो कजरना निगाहें
वो हँसकर 'ना' कहने की उलझाने वाली फ़ितरत
तेरी दगा को भी हम इश्क़ से बदस्तूर मानते हैं...
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इतने भी कद्रदान न तेरे कि जीना जैसे भूल गए हों
बस इतनी सी है तलब तुझे बेशुमार चाहते हैं...
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गजरे जीवन से टूट गए, कानों से पायल रूठ गए
जो बची है मेरे कानो में तेरी आवाज़ को संगीत मानते हैं...
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उस मोड़ का क्या पता जहां मिलें हम और साँसें भी हों
जहां सांझ एक हो दोनो की और एक ही सुबहें भी हों
रगों में उस वक़्त का नशा हर पहर खींच ले जाते हैं
इसी क़वायद से तो मोहल्ले में 'मशहूर' जानते हैं...
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तेरी दगा को भी इश्क़ सा हम बदस्तूर मानते हैं ।

Sunday, 21 May 2017

बस बुलबुलों सी बातें हैं




बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।
चौखट पर देखे ख़्वाब, खिलखिलाते - बुदबुदाते
जेबों को टटोला तो ख़्वाब कहीं दिखे नहीं
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।

जूते छोटे हुए नही हैं, न पाँव ने घेरा बदला है
थोड़े ही हैं बादल भी काले, बच्चों ने मौसम समझा है
शायद बन जाएं तूफ़ान कल को ये बात अभी भी सही नाही
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।

हँस लेते हैं, चलो मान लेते हैं उड़ना भी कल नामुमकिन नही
रंगों की भी दुनिया अलग है पेड़ों को सुनना नामुमकिन नही
सच आएगा आहिस्ते से, ये बात अभी कही नही
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।

बढ़ जाएगी क़दमों की दूरी, रुक जाएगी सोच की डोरी
रम जायेंगे किताबों में कल को, खो जायेगी सोच वो भोली
अब बरसेगा छूटकर पानी, बात बुरी है गलत नही
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।

Thursday, 11 May 2017

शोहरत !


शोहरत तेरे नखरे बड़े हैं इज्ज़तदारों के दरबार में
कभी कलाई थाम तुझे तेरे बाज़ार से उठा लाऊंगा |

बरसों बरस में जाना तू बिकती है बोलियों में
मैं तेरी बोली इज्ज़त की किश्तों में लगाऊंगा |

सोचा तो था जो तू आएगी, तर जायेगी रूह तक
अब नस नस को मेरी मैं घूँट तेरे पिलाऊंगा |

जयादा ताकुल्लुफ़ न हुयी मुझे वक़्त की आड़ में छिपने में
चाँद बादलों को रोशन करता है मैं वक़्त को कर जाऊंगा |

ना हुआ समंदर तो क्या हुआ इस पोखर में वो हिम्मत है
रुके सागर को मैं ज़मीन चीरते मिल आऊंगा |

ऐ शोहरत तू इल्म न कर यूँ अपनी खूबसूरती पर
तू इश्क नही कोई कि मैं हँसकर फ़ना हो जाऊंगा |

मिलना मुझसे बुलंदियों पर तू आज नहीं तो कल सही
तेरा मुझे मालूम नही मैं तो शिखर तक जाऊँगा |

कभी कलाई थाम तुझे तेरे बाज़ार से उठा लाऊंगा |