Friday, 15 February 2019

तेरी आँखों को बस ताँकते


मैं कितना दूर चला आया तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं दुनिया भूल कहीं आया तेरी आँखों को बस ताँकते
तुम्हारे रंग का जो भंग मेरी रगों का है अंग
मैं होली रोज़ मना आया तेरी आँखों को बस ताँकते

ये आँखें साल बिता दीं तेरी आँखों से नज़र हटाने में
प्यास ने झील दिखा दी तेरी आँखों के मधुशालय में
मैं तुम तक बेहोश ही आया तेरी ख़ुशबू को बस भाँपते
ख़ुदा को भूल मैं आया तेरी आँखों को बस ताँकते

मन्नतें माँग सौ आया मैं तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं तुम को हाथ लगा आया तेरी आँखों को बस ताँकते
ज़ुबान पर शब्द बहक गए तेरी आँखों को बस ताँकते
आँखों पर ग़ज़ल बना आया तेरी आँखों को बस ताँकते

जिया बचपना जवानी तक, मैं मंज़िल चार जला आया तेरी को बस ताँकते
जवानी नाम तेरे कर आया तेरी आँखों को बस ताँकते
जो कहता है ख़ुद को अल्लाह ख़ुद को जगन्नाथ बताता है
वहम उसका तोड़ चला आया तेरी आँखों को बस ताँकते

तुम्हारे रंग का जो भंग मेरी रगों का है अंग
मैं होली रोज़ मना आया तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं कितना दूर चला आया तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं दुनिया भूल कहीं आया तेरी आँखों को बस ताँकते

Saturday, 2 February 2019

बच्चे


नीम की वो सूखी शाख से होते हैं
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
अब भागते नही वो लंबी गाड़ियों के पीछे
चारों पहर रोटी की ताक में रहते हैं।
फरिश्तों को भी एहसास है इस कहर का
वो खुदगर्ज़ इमारतों की बाँह में सोते हैं।
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।

बड़ी ही एहतियात से पसरते हैं वो जमीन पर
तन जिनके चादर के मोहताज़ ना होते हैं।
बारिशों में लोग भीगते हैं अमन से
और सड़कों पर बच्चे बेहिसाब सोते हैं।
अक्सर आती हैं ख़बरें दरवाज़ों के नीचे से
सक्रीन पर चमक कर या कानों के पीछे से 
कि कौन मरा और कौन बिका 
था नाम क्या है कौन सागा
वो क्या सपने देखता था
वो क्यूँ चूड़ियाँ बेचता था 
कौन सा सिगनल उसका था 
वो कौन उमर का बच्चा था
की क्या कहते थे लोग उसे
कहाँ रखा गया था क़ैद उसे
मुआजफ़ज़ा क्या सरकार का है
कितना मुम्बई कितना बंगाल का है 
कितना मुम्बई कितना बंगाल का है ...
माँ-बाप सभी के हमारे जितने कामयाब ना होते हैं
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
अब भागते नही वो लंबी गाड़ियों के पीछे
चारों पहर रोटी की ताक में रहते हैं।
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
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