बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।
चौखट पर देखे ख़्वाब, खिलखिलाते - बुदबुदाते
जेबों को टटोला तो ख़्वाब कहीं दिखे नहीं
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।
जूते छोटे हुए नही हैं, न पाँव ने घेरा बदला है
थोड़े ही हैं बादल भी काले, बच्चों ने मौसम समझा है
शायद बन जाएं तूफ़ान कल को ये बात अभी भी सही नाही
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।
हँस लेते हैं, चलो मान लेते हैं उड़ना भी कल नामुमकिन नही
रंगों की भी दुनिया अलग है पेड़ों को सुनना नामुमकिन नही
सच आएगा आहिस्ते से, ये बात अभी कही नही
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।
बढ़ जाएगी क़दमों की दूरी, रुक जाएगी सोच की डोरी
रम जायेंगे किताबों में कल को, खो जायेगी सोच वो भोली
अब बरसेगा छूटकर पानी, बात बुरी है गलत नही
बस बुलबुलों सी बातें हैं, आज हैं कल नहीं ।

