वो मेरी ख़ुशी में रो देती है
वो मेरे ग़मों में रो देती है
माँ जिस दिन माँ बनती है
बीती ज़िंदगी खो देती है
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अब झाँकती नहीं वो ख़यालों की दीवार से
नए शौक़ों के पीछे वही पुरानी रफ़्तार से
अक्सर जाया करती है बाज़ार एक-आध साड़ियों की ताक में
माँ चार ले आती है शर्ट बेटे के प्यार में
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दाने-दाने पर सुना है नाम किसी का होता है
निवालों पर पहला हक़ बस माँ का ही होता है
वो खाती है एक मगर दीदी को दो खिलाती है
माँ भोली होती है: बच्चे बड़े हो जाएँ तो डाँटने में सकुचाती है
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हज़ार लग गए भगवान बस एक माँ बनाने में
हज़ार चुक गए अरमान बस दो संतान बनाने में
हज़ार दफ़े आवाज़ उठाई मैंने उसपर बचकाने में
हज़ार बार थी रोयी वो भलाई थी जब हाथ उठाने में
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वो नींद में भी जगती है
सपनों में भी ख़याल लौटा देती है
माँ जिस दिन माँ बनती है
बीती ज़िंदगी गँवा देती है
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अब झाँकती नहीं वो ख़यालों की दीवार से
मेरे शौक़, मेरे ख़्वाब वो अपने बना लेती है
माँ जिस दिन माँ बनती है
बीती ज़िंदगी गँवा देती है
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