Friday, 15 February 2019

तेरी आँखों को बस ताँकते


मैं कितना दूर चला आया तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं दुनिया भूल कहीं आया तेरी आँखों को बस ताँकते
तुम्हारे रंग का जो भंग मेरी रगों का है अंग
मैं होली रोज़ मना आया तेरी आँखों को बस ताँकते

ये आँखें साल बिता दीं तेरी आँखों से नज़र हटाने में
प्यास ने झील दिखा दी तेरी आँखों के मधुशालय में
मैं तुम तक बेहोश ही आया तेरी ख़ुशबू को बस भाँपते
ख़ुदा को भूल मैं आया तेरी आँखों को बस ताँकते

मन्नतें माँग सौ आया मैं तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं तुम को हाथ लगा आया तेरी आँखों को बस ताँकते
ज़ुबान पर शब्द बहक गए तेरी आँखों को बस ताँकते
आँखों पर ग़ज़ल बना आया तेरी आँखों को बस ताँकते

जिया बचपना जवानी तक, मैं मंज़िल चार जला आया तेरी को बस ताँकते
जवानी नाम तेरे कर आया तेरी आँखों को बस ताँकते
जो कहता है ख़ुद को अल्लाह ख़ुद को जगन्नाथ बताता है
वहम उसका तोड़ चला आया तेरी आँखों को बस ताँकते

तुम्हारे रंग का जो भंग मेरी रगों का है अंग
मैं होली रोज़ मना आया तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं कितना दूर चला आया तेरी आँखों को बस ताँकते
मैं दुनिया भूल कहीं आया तेरी आँखों को बस ताँकते

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