Friday, 13 June 2014

बस ज़रा सा वक़्त है...

कहते हैं कुछ लोगों को भुलाना उतना ही
 मुश्किल होता है जितना उन्हे याद करना...


तुझको भूल जाने मे अब बस ज़रा सा वक़्त है
सांसो से टूट जाने मे अब बस ज़रा सा वक़्त है
तू कहा करती थी अक्सर तुझे बारिश मे आग भाती
 है
मुझे रोते-रोते जल जाने मे अब बस ज़रा सा वक़्त है...

सौ बार टूटकर ये दिल हर बार जुड़ जाया करता है
एक और दफे टूट जाने मे इसे अब बस ज़रा सा वक़्त है
किस मिट्टी की थी उम्मीदें मरकर अब तक जीते आई
आख़िरी दफे मर जाने मे इन्हे अब बस ज़रा सा वक़्त है...

जल उठेगा ये बदन अब तेरा पीछा ना करेंगे
बुझ जाएँगी ये आँखे भी,छिप्कर देखा ना करेंगे
कदम-कदम पर मुड़ने की अपनी आदत बदल लेना
राख बनने जा रहा, तेरा इंतेज़ार ना किया करेंगे...

बड़ी देर मे मिली मंज़िल,उम्रभर राहों मे ही रह गये
कश्ती को सागर मे घुल जाने मे अब बस ज़रा सा वक़्त है
दूर रहने का तुझको मैं वादा निभाने जा रहा
पूरा करने मे ये कहानी मुझको अब बस ज़रा सा वक़्त है...

तुझको भूल जाने मे अब बस ज़रा सा वक़्त है
सांसो से टूट जाने मे अब बस ज़रा सा वक़्त है

#MyInkMyPrints
#Poem
#apourv_pandey

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