तुमको क्या ख़बर कि कितनी मोहब्बत है तुमसे
जो बयाँ कर दूं तो तुझे ख़ुद से मोहब्बत हो जाए...
मन्नतें मेरी क्यों बेआवाज़ रहती हैं
इज़हार जो कर दूं सारी हकीक़त बयाँ हो जाए...
निगाहों का असर है, साँसों की मनमानी है
तुझे देखने को चाँद की सूरज से बग़ावत हो जाए...
क्या खता उनकी जो अब सोते नही हैं रातों में?
तेरे इश्क़ में जागकर रातें नूरानी हो जाएं...
तुमको क्या ख़बर कि कितनी मोहब्बत है तुमसे
जो बयाँ कर दूं तो तुझे ख़ुद से मोहब्बत हो जाए...
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