शोहरत के सपनों से दूर सोकर तो देख
काला चश्मा उतार, जी भर रोकर तो देख
गुलाम बन किसी का क्यों मारा - मारा फिरता है
रुक सकते हैं कदम, एक बार रोककर तो देख
पैसे की आड़ में और कितनी खुशियाँ गँवाएगा
भरी जेब कैसे अपने साथ लेकर जाएगा
खाली कर जेबों को हवा के साथ थोड़ा घूम ले
परिंदे अपनी चाहतों के आज़ाद कर दे तू
जो थामे है तुझे हर बंधन तबाह कर दे तू
खोल अपनी बाहें नए पलों से मिल
नन्ही कली है तू, सावन के फूल सा खिल
जो रिश्ते पीछे छूट गए जा उनको फिर माना ले
जो फ़ीके रह गए पल, जा उनको फिर सजा ले
कितनी हसीं है दुनिया, नज़र तो दौड़ा ज़रा
सामने है मंज़िल, खुलकर सांस तो भर ले ज़रा
हर गम को सीने से आज़ाद कर ज़रा
दो पल तो खुलकर सांस भर ज़रा...
हर गम को सीने से आज़ाद कर ज़रा
दो पल तो खुलकर सांस भर ज़रा...

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