नीम की वो सूखी शाख से होते हैं
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
अब भागते नही वो लंबी गाड़ियों के पीछे
चारों पहर रोटी की ताक में रहते हैं।
फरिश्तों को भी एहसास है इस कहर का
वो खुदगर्ज़ इमारतों की बाँह में सोते हैं।
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
बड़ी ही एहतियात से पसरते हैं वो जमीन पर
तन जिनके चादर के मोहताज़ ना होते हैं।
बारिशों में लोग भीगते हैं अमन से
और सड़कों पर बच्चे बेहिसाब सोते हैं।
अक्सर आती हैं ख़बरें दरवाज़ों के नीचे से
सक्रीन पर चमक कर या कानों के पीछे से
कि कौन मरा और कौन बिका
था नाम क्या है कौन सागा
वो क्या सपने देखता था
वो क्यूँ चूड़ियाँ बेचता था
कौन सा सिगनल उसका था
वो कौन उमर का बच्चा था
की क्या कहते थे लोग उसे
कहाँ रखा गया था क़ैद उसे
मुआजफ़ज़ा क्या सरकार का है
कितना मुम्बई कितना बंगाल का है
कितना मुम्बई कितना बंगाल का है ...
माँ-बाप सभी के हमारे जितने कामयाब ना होते हैं
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
अब भागते नही वो लंबी गाड़ियों के पीछे
चारों पहर रोटी की ताक में रहते हैं।
लाखों हैं बच्चे जो फुटपाथ पर सोते हैं।
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Bahut sahi bhai..
ReplyDeleteWo sota hai raat bhar,
Wahi dubak footpath par,
Naseeb kaha hoti teen wakat roti usse,
Sau mushkilo sang bhi, has deta hai wo har baat par...
Kya baat hai bhai..wahin dubak kar footpath par! 🙏🏻
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