Friday, 27 November 2020

तेरा नाम


सफ़र में मिला अनजान मैं उससे बात करूँ तो क्या
ज़ुबान आवाज़ उठाती है तो तेरा नाम आता है

वो भोला वो बेचारा सुनाया काम के क़िस्से
जो मेरा काम वो पूछा तो तेरा ज़िक्र आता है

मुझसे कहा कि ज्ञानी है हाथों की लकीरों का
मैं लकीरें पढ़ाता हूँ तो तेरा नाम आता है

हसीन पहचान है मेरी जो मुझको याद करते हैं 
मेरी हर याद में सबकी तेरा ही ज़िक्र आता है

ज़ुबान आवाज़ उठाती है तो तेरा नाम आता है

शिकायतें ख़ूब है मेरी वो तेरा पता माँगती हैं
जब-जब प्यार आता है तो तेरा नाम आता है

 मन्नतें हज़ार मैं माँगू अपनी ख़ुशगवारी की
दुआओं में हाथ उठता है तो तेरा ज़िक्र आता है

मिलकर ढूँढें बहाना जो तुम को पास फिर ले आए
मैं एक भी साँस भी भर लूँ तो तेरा नाम आता है

मोहलत दो ज़रा ख़ुद को कि शायद लौट आना हो
 बहस उम्मीद की जब हो तो तेरा ज़िक्र आता है 
ज़ुबान आवाज़ उठाती है तो तेरा नाम आता है

वो राही दाद देता है मेरी ख़ुशनसीबी का
नसीब का दाद जो मैं दूँ तो तेरा नाम आता है

 नफ़ा-नुक़सान की बातें करम-तक़दीर की बातें
खुदा हिसाब करता है तो तेरा ज़िक्र आता है

ज़ुबान आवाज़ उठाती है तो तेरा नाम आता है
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